इण्टरनेट (Internet)
इण्टरनेट शब्द अंग्रेजी के इण्टर (Inter) तथा नेट (Net) दो शब्दों से मिलकर बना है। इण्टर ((Inter) शब्द से अभिप्राय है-इण्टरनेशनल ((International) अर्थात् अन्तरराष्ट्रीय तथा नेट (Net) शब्द का अभिप्राय है-नेटवर्क (Network) अर्थात् संजाल। अतः इण्टरनेट का तात्पर्य अन्तरराष्ट्रीय या पारस्परिक संजाल से है। इण्टरनेट विश्व के विभिन्न स्थानों पर स्थापित टेलीफोन लाइन के सहयोग से एक-दूसरे के साथ जुड़े कम्प्यूटर्स का ऐसा नेटवर्क है जो सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए विश्वस्तरीय आंकड़ा-सूचना सेवा उपलब्ध कराता है। इसका ज्ञान भण्डारण विशाल है। इसके माध्यम से उपभोक्ता अपनी मनचाही पुस्तक, इच्छित बाजार, सूचनाएं, मनमाफिक फिल्में , संगीत कुछ ही क्षणों में सुन सकते हैं। इस सेवा के अन्तर्गत अनेक छोटे, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय नेटवर्क सम्बद्ध होते हैं। विभिन्न उपकरणों से युक्त इण्टरनेट सम्पूर्ण विश्व समुदाय को विचार-विमर्श का एक मंच प्रदान कर सूचना का कारगर प्रसारक बन सकता है और विश्व-गाँव की स्थापना में सहायक बन सकता है।
इण्टरनेट का इतिहास
1969 ई0 में शीत युद्ध के दौरान इण्टरनेट का प्रारम्भ अमेरिका के प्रतिरक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन स्थित -एरपा (ARPA) ‘एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी’ (Advanced Research Projects Agency) की संकल्पना से हुआ था। अमेरिकी रक्षा विभाग एक ऐसी कमाण्ड कंट्रोल संरचना विकसित करना चाहते थे जिस पर सोवियत संघ के परमाणु आक्रमण का प्रभाव न पड़े। इसके लिए उन्होंने विकेंद्रित सत्ता वाला नेटवर्क बनाया जिसमें सभी कम्प्यूटर्स को बराबर का दर्जा दिया गया। इस नेटवर्क का उद्देश्य नाभिकीय युद्ध की स्थिति में अमेरिकी सूचना संसाधनों का संरक्षण करना था।
इण्टरनेट कार्यपद्धति
इण्टरनेट या सूचना राजपथ ऑप्टिकल फॉइबर तारों से जु़ड़े कम्प्यूटर्स का एक व्यापक नेटवर्क है। इसमें विभिन्न प्रकार की सूचनाएं; जैसे-लेख, चित्र, ऑडियो, वीडियो एवं आंकड़ों आदि को प्रकाश की गति से भेजा जा सकता है। इसकी कार्यपद्धति बहुत सरल है। इस प्रणाली में कम्प्यूटर्स के जाल को एक मुख्य कम्प्यूटर आपस में टेलीफोन लाइन द्वारा जोड़ा जाता है। यदि कम्प्यूटर्स के जाल को आम तारों द्वारा जोड़ा जाता है तो इसे नेटवर्क कहा जाता है। कम्प्यूटर तथा टेलीफोन आपस में मोडेम के माध्यम से जुड़े होते हैं। मोडेम कम्प्यूटर के डिजिटल सिग्नल को टेलीफोन के मैग्नेटिक सिग्नल तथा मैग्नेटिक को डिजिटल सिग्नल में बदलने का कार्य करता है। सूचनाओं का यह भण्डार मुक्त एवं स्वतंत्र है। इस पर किसी भी केंद्रीभूत प्रशासन, संस्था या कंपनी का नियंत्रण नहीं है। इसीलिए इण्टरनेट को कम्प्यूटर्स का मुक्त संयोजन कहा जाता है। इण्टरनेट उपयोग के लिए कम्प्यूटर, एक मोडेम, टेलीफोन लाइन, आवश्यक सॉफ्टवेयर तथा इण्टरनेट नेटवर्क की आवश्यकता होती है।
इण्टरनेट उपयोग के लिए दो संकेत WWW (World Wide Web) तथा http/WWW (Hypertext Transfer Protocol/ World Wide Web) महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हें इण्टरनेट का केन्द्र बिन्दु माना जाता है। इण्टरनेट की प्रत्येक वेबसाइट इसके अंग हैं। यह केन्द्र विश्व की इण्टरनेट प्रणाली को नियंत्रित करता है। यह अमेरिका के वर्जीनिया में स्थित है। विश्व में जब कोई वेबसाइट ओपन की जाती है तो इसकी सूचना कूट भाषा के माध्यम से इस कार्यालय तक पहुँच जाती है। यह सूचना http (हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकाल) कूट भाषा के माध्यम से दी जाती है। यह सूचना जब WWW (वर्ल्ड वाइड वेब) कार्यालय तक पहुँचती है, तभी साइट ओपन होती है।
भारत में इण्टरनेट
देश में इण्टरनेट की शुरूआत 1987-88 में गयी थी। विदेश संचार निगम लिमिटेड द्वारा इण्टरनेट सुविधा आमजन को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 15 अगस्त, 1995 में ‘गेटवे इण्टरनेट’ सेवा आरम्भ की गई।
निजी क्षेत्र की कम्पनी सत्यम इनफो वे 21 नवम्बर, 1998 से इण्टरनेट सेवा शुरू करने वाली निजी क्षेत्र की पहली कम्पनी तथा देश की दूसरी कम्पनी बनी जिसने इण्टरनेट सेवा की शुरूआत की।
सभी लोगों को इण्टरनेट सुविधा प्रदान करने के लिए मुम्बई में इण्टरनेट एक्सेस कोड की स्थापना की गई। यह सेटेलाइट के माध्यम से अमेरिका और यूरोप में इण्टरनेट से जुड़ गए। इसकी सहायता से विदेशी कार्यक्रम देखने, ई-मेल भेजने, समाचार पत्र पढ़ना आदि संभव हो सका।
वर्तमान में भारत में इण्टरनेट सुविधा उपलब्ध कराने वाली तीन सरकारी एजेंसियाँ हैं-
- दूरसंचार विभाग
2. महानगर टेलीकॉम निगम लिमिटेड (MTNL)
3. विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL)
इण्टरनेट से संबंधित तकनीकी शब्द
बैंडविथ-यह तकनीकी शब्द किसी संचार माध्यम की सूचना वहन करने की क्षमता प्रदर्शित करता है। डिजिटल युक्तियों के संदर्भ में बैंडविथ का अर्थ है किसी निश्चित अवधि के दौरान संचारित की गई सूचना अथवा डाटा की मात्रा (बिट्स)। अर्थात् बैंडविथ जितनी अधिक होगी, उतनी ही अधिक सूचनाओं का आदान-प्रदान संभव होगा।
ब्रॉडबैंड-सूचनाओं के संचारण की आधुनिक तकनीक जिसमें अत्यधिक मात्रा में सूचनाओं का कम समय में संप्रेषण किया जा सकता है। इसका सबसे लोकप्रिय उदाहरण केबल टी.वी. है।
मोडेम-मोडेम कम्प्यूटर को बाहरी सूचना एवं दूरसंचार उपकरण से जोड़ने का कार्य करता है। इसका मुख्य कार्य बाहरी एनलॉग सिग्नल को डिजिटल सिग्नल में बदलना व आंतरिक डिजिटल सिग्नल को एनलॉग में बदलना है। यह सिग्नल मॉडयूलेशन पद्धति पर आधारित है।
ब्राउजर-इण्टरनेट का उपयोग करने के लिए प्रयोग किया जाने वाला सॉफ्टवेयर ‘ब्राउजर’ कहलाता है। इण्टरनेट एक्सप्लोरर एवं नेटस्केप नेवीगेटर प्रमुख प्रचलित ब्राउजर हैं।
वर्ल्ड वाइड वेब (WWW)-वर्ल्ड वाइड वेब सम्पूर्ण विश्व में फैला एक प्रकार का डाटाबेस है। इससे कोई भी इण्टरनेट यूजर सूचनाएं प्राप्त कर सकता है। इसमें सूचनाओं को विषय के अनुसार शीर्षकों और उपशीर्षकों में विभाजित करके रखा गया है। वर्ल्ड वाइड वेब को ब्रिट टिम बर्नर्स-ली ने 1989 में विकसित किया तथा 1990 में पहला WWW सरवर तैयार किया।
सरवर-यह एक कम्प्यूटर रनिंग सॉफ्टवेयर है जो कई कम्प्यूटर्स के बीच संसाधनों को साझा करने में सहायक होता है। सरवर कई प्रकार के होते हैं’
- एचटीटीपी सरवर-इण्टरनेट को कनेक्ट करना।
- एफटीपी सरवर-एफटीपी प्रोटोकॉल का प्रयोग करते हुए नेटवर्क पर फाइल ट्रांसफर।
- मेल सरवर-नेटवर्क पर ई-मेल स्टोर और ट्रांसफर।
- प्रॉक्सी सरवर-क्लाइंट और मेन सरवर के बीच स्थापित सरवर, जो डाटा के फिल्टर करने और कनेक्शन शेयरिंग में मदद करता है।
सर्च इंजन-इण्टरनेट पर सूचनाओं को खोजने के लिए जिस माध्यम का प्रयोग किया जाता है उसे सर्च इंजन कहते हैं। प्रमुख सर्च इंजन- Google, Yahoo! Yandex, Ask, Bing, Baidu, AOL आदि।
बैकबोन-एक बड़ी प्रसारण लाइन जो अपने साथ जुड़ी अनेक छोटी-छोटी प्रसारण लाइनों से सूचनाएं एकत्र कर आगे संचरित करती है।
ऐसेस प्रोवाइडर-इण्टरनेट उपलब्ध कराने वाली कम्पनियों को ऐसेस प्रोवाइडर कहा जाता है। कुछ प्रमुख ऐसेस प्रोवाइडर हैं-विदेश संचार निगम लिमिटेड, महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड, एयरटेल, जियो, भारत संचार निगम लिमिटेड।
इंटीग्रेटेड सर्विसेज डिजिटल नेटवर्क (ISDN)-इसके अन्तर्गत डिजिटल सूचना को सामान्य टेलीफोन नेटवर्क पर 128 केबीपीएस की रफ्तार पर प्रेषित किया जा सकता है। इसमें डाटा, वीडियो और आवाज को एक साथ प्रसारण संभव है। भारत में महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड तथा विदेश संचार निगम लिमिटेड आई.एस.डी.एन. सुविधा उपलब्ध कराते हैं।
लीज्ड लाइन-किन्हीं दो स्थानों के बीच स्थायी टेलीफोन कनेक्शन को लीज्ड लाइन कहा जाता है। इसकी विशेषता है कि यह हमेशा सक्रिय रहती है। भारत में व्यावसायिक क्षेत्र में लीज्ड लाइन लेने का प्रचलन है।
यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (URL)-इण्टरनेट पर किसी वेबसाइट पेज फाइल का यूनीक एड्रेस है। https//www.google.com/images/urt.htm ,एक URL है। इसमें https// प्रोटोकॉल है। www.google.com डोमेन नेम है। images डायरेक्टरी है।
केबीपीएस, एमबीपीएस और जीबीपीएस (KBPS, MBPS, GBPS)-ये इकाइयां डिजिटल माध्यम में संचार की गति को प्रदर्शित करती हैं। केबीपीएस से अभिप्राय किलो बिट्स प्रति सेकण्ड, एमबीपीएस से अभिप्राय मेगा बिट्स प्रति सेकण्ड और जीबीपीएस गीगा बिट्स प्रति सेकण्ड।
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