कंप्यूटर
कम्प्यूटर अथवा संगणक
कम्प्यूटर अथवा संगणक एक ऐसा यंत्र है जिसका उपयोग गणना करने के लिए किया जाता था। लगभग एक सदीं के गहन अनुसंधान के बाद कम्प्यूटर का आविष्कार एक ज्यादा सूक्षम कैलकुलेटर के तौर पर किया गया था, जिसकी स्मृति ज्यादा नहीं थी बल्कि यह कैलकुलेटर की तुलना में तीव्रता से गणना कर सकता था। कम्प्यूटर का उद्गम 1642 ई0 में 18 वर्षीय ब्लेज पास्कल द्वारा हुआ, जबकि 1833 ई0 में ब्रिटेन के गणितज्ञ चार्ल्स वेबेज ने एक मशीन का आविष्कार किया जिसको ‘ऐनेलिटिक इंजन’ का नाम दिया गया। वर्ष 1937 में ‘मार्क-1’ नामक प्रथम कम्प्यूटर का निर्माण किया जा सका, जो आंकड़ों को संजोकर रखने के साथ-साथ उन्हें काट-छांट और संयोजित भी कर सकता था। डॉ. वॉन न्यूमैन ने कम्प्यूटर के कार्य हेतु द्विआयामी पद्धति (Binary System) का प्रयोग किया और संचयित प्रोग्राम का उपयोग किया।
आकार के परिमाण के आधार पर कम्प्यूटर चार प्रकार के हैं-
1.माइक्रो कम्प्यूटर
2.मिनी कम्प्यूटर
3.मेनफ्रेम कम्प्यूटर
4.सुपर कम्प्यूटर
वर्तमान में प्रयुक्त होने वाला कम्प्यूटर चौथे चरण का है, जबकि वैज्ञानिक पाँचवीं पीढ़ी के कम्प्यूटर के विकास में प्रयासरत हैं। कम्प्यूटर की पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी पीढ़ी क्रमशः 1944, 1956, 1965 और 1971 में अस्तित्व में आई।
भारत में कम्प्यूटर का विकास :-
भारत में कम्प्यूटर का विकास 1955 से आरम्भ हुआ। प्रारम्भिक वर्षों में कम्प्यूटरों का उपयोग मुख्य रूप से वैज्ञानिक गणनाओं के लिए किया जाता था। किन्तु 1980 के दशक तक वेतन बनाने और आवश्यक प्रबंध जैसी गतिविधियों के अतिरिक्त कम्प्यूटरों का उपयोग संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाने लगा। वर्ष 1990 के दशक के अंत तक सूचना प्रौद्योगिकी संस्कृति महानगरों से बाहर जिला स्तर तक प्रसारित हो गई। भारतीय हार्डवेयर विनिर्माताओं ने बढ़ती मांग की चुनौती का सामना किया और ऐसे निजी कम्प्यूटरों का उत्पादन स्थानीय स्तर पर किया, जो अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। निजी कम्प्यूटर एक प्रकार का माइक्रो कम्प्यूटर है जिसमें एक माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग किय जाता है तथा इसका उपयोग एक समय में एक व्यक्ति द्वारा ही किया जा सकता है। भारत का पहला कम्प्यूटेरियम कर्नाटक के बंगलौर में स्थापित किया गया है। इसमें बच्चे पारस्परिक गजेट्री एवं परोक्ष वास्तविक अनुभवों के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी युग के चमत्कारों से अवगत हो सकेंगे। भारत सरकार ने आम आदमी के लिए कम लागत का मोबाइल डेस्क टॉप कम्प्यूटर जारी किया है।
कम्प्यूटर के विभिन्न भाग :-
कम्प्यूटर के प्रमुख दो भाग हैं-
1.हार्डवेयर
2.सॉफ्टवेयर
1.हार्डवेयर :-कम्प्यूटर के वे सभी भाग जिनका स्पर्श किया जा सकता है, हार्डवेयर कहलाते हैं। कार्य प्रणाली के आधार पर इसे निम्न चार इकाइयों में विभाजित किया गया है।
1.इनपुट इकाई
2.प्रोसेसिंग इकाई
3.आउट इकाई
4.संग्रह इकाई
1.इनपुट इकाई
इस इकाई का उपयोग आंकड़ों, तथ्यों व निर्देशों को कम्प्यूटर यूनिट के अन्दर संप्रेषित करने के लिए किया जाता है। मुख्य रूप से उपयोग होने वाली इनपुट इकाइयां हैं-कीबोर्ड तथा माउस। कीबोर्ड एक इलेक्ट्रोमेक्निकल इकाई है। इसका मेकेनिकल भाग टाइपराइटर के समान होता है, जिसके द्वारा इलेक्ट्रिक सिग्नल के माध्यम से अक्षर, संख्याएं व निर्देश कम्प्यूटर की प्रोसेसिंग इकाई को संपेषित कर सकते हैं। माउस प्वाइटिंग पद्धति की निर्देशांक प्रणाली पर आधारित है। यह ग्राफिकल यूजर इन्टरफेस प्रणाली में निर्देशों को चित्र के माध्यम से सम्प्रेषित करने के लिए उपयोग में आता है।

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2.प्रोसेसिंग इकाई
कम्प्यूटर को संप्रेषित किए गये निर्देशों को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने का कार्य प्रोसेसिंग इकाई का होता है। इसका मुख्य भाग है-सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) सी.पी.यू. कम्प्यूटर का सबसे प्रमुख भाग है जो कि निर्देशों का उपयोग कर पूरी कम्प्यूटर प्रणाली को संचालित करता है। यह कम्प्यूटर का हृदय कहलाता है तथा इससे अन्य सभी पेरीफेरल्स (अन्य कम्प्यूटर उपकरण) जैसे-कीबोर्ड, माउस, मॉनीटर, प्रिंटर आदि सभी मदरबोर्ड के माध्यम से जुड़े रहते हैं। सी.पी.यू. प्रमुखतः निम्नलिखित तीन भागों में विभक्त होता है-कंट्रोल यूनिट (CU), अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ALU) और मेमोरी।
कंट्रोल यूनिट (CU)-निर्देशों का सही उपयोग व उनको कंट्रोल करने का कार्यं।
अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ALU)-सभी प्रकार के अंकीय व तार्किक निर्देशों को क्रियान्वित करने का कार्य।
मेमोरी-निर्देशों को कुछ समय के लिए संग्रहीत करने का कार्य।
3.आउट इकाई
इनपुट इकाई से प्रेषित तथ्य व निर्देश प्रोसेसिंग इकाई से क्रियान्वित होने के लिए जिस भाग के पास जाते है उसे आउटपुट इकाई कहते हैं। यह मुख्यतः दो भागों में विभाजित है-सॉफ्ट कॉपी और हार्ड कॉपी। सॉफ्ट कॉपी के लिए मॉनीटर का उपयोग करते हैं तथा हार्ड कॉपी के लिए प्रिंटर का।

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मॉनीटर
मॉनीटर घरों में उपयोग होने वाले टी.वी. के समान अधिकांशतः कैथोड रे ट्यूब प्रणाली पर आधारित होता है। लैपटॉप जैसे कम्प्यूटिंग डिवाइस के मॉनीटर में लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले (LCD) या गैस प्लाज्मा का प्रयोग होता है। मॉनीटर का उपयोग सूचनाओं को कम्प्यूटर उपयोगकर्ता के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है। मॉनीटर को स्क्रीन साइज और रिजोल्यूशन के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। रिजाल्यूशन का अर्थ है स्क्रीन पर मौजूद कलर डॉट्स जिन्हें पिक्सेल भी कहा जाता है। स्क्रीन पर उपस्थित पिक्सेल के बीच स्पेस को डॉट पिच कहा जाता है। डॉट पिच जितना कम हो उतना ही अच्छा रहता है।
प्रिंटर
इसका उपयोग कई प्रकार की कार्य प्रणाली पर आधारित आंकड़ों, संख्याओं, चित्रों ग्राफों या अन्य प्रकार की सूचनाओं को कागज पर टंकित करने के लिए किया जाता है।

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4.संग्रह इकाई (मेमोरी)
सूचनाओं को बाद में प्रयोग में लाने हेतु कम्प्यूटर में संग्रह इकाई का उपयोग किया जाता है। यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है-1.प्राइमरी मेमोरी, 2.सेकेण्डरी मेमोरी या ऑक्जेलरी मेमोरी।
प्राइमरी मेमोरी के अंतर्गत रैम (RAM) व रोम (ROM) आते हैं। प्राइमरी मेमोरी का उपयोग प्रोसेसिंग इकाई द्वारा कार्य करते समय निर्देशों को संगृहीत करने के लिए रैम तथा कम्प्यूटर प्रणाली को चलाने के लिए निर्देशों को संगृहीत करने हेतु रोम का उपयोग किया जाता है।
Computer Memory Units
| SYMBOL | QUANTITY |
| 1 BIT | 1 CELL, BINARY 0 OR 1 |
| 4 BITS | ½ BYTE |
| 8 BITS | 1 BYTE |
| 1024 BYTE | 1 KILOBYTE |
| 1024 MEGABYTE | 1 GIGABYTE |
| 1024 GIGABYTE | 1 TERABYTE |
| 1024 TERABYTE | 1 PETABYTE |
| 1024 PETABYTE | 1 HEXABYTE |
| 1024 HEXABYTE | 1 ZEETABYTE |
रैम (RAM)
रैंडम एक्सेस मेमोरी (Random Access Memory) या रैम कम्प्यूटर मुख्य मेमोरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। कम्प्यूटर में संप्रेषित सभी डाटा सीधे रैम में ही जमा होते हैं। रैम से ही आवश्यकतानुसार अन्य जगह भेजे जाते हैं। जब कम्प्यूटर पर कोई प्रोग्राम रन करता है तो उस समय प्रोग्राम के निर्देशों और डाटा को रैम में सुरक्षित रखा जाता है जिससे सी.पी.यू. अपना कार्य तीव्र गति से कर सके। यह अस्थायी मेमोरी होती है क्योंकि जब पी.सी. को ऑफ किया जाता है तो रैम में मौजूद सभी डाटा समाप्त हो जाते है।
रोम (ROM)
रोम अर्थात् रीड ओनली मेमोरी (Read-Only Memory) एक स्थायी स्मृति है जो कम्प्यूटर के निर्माण के समय ही स्थापित कर दी जाती है। कम्प्यूटर ऑन करने पर सी.पी.यू. को यह बताते हैं कि उसे क्या करना है। यहाँ कम्प्यूटर के बंद हो जाने पर भी इसमे डाटा सुरक्षित रहता है। इस प्रकार की स्मृति का प्रयोग उस समय किया जाता है, जब कम्प्यूटर को किसी कार्य विशेष को बार-बार दोहराना होता है जैसे कपड़े धोने की मशीन आदि। सेकेंडरी मेमोरी सूचना को स्थायी रूप से संग्रह करने के काम आती है। विभिन्न प्रकार की संग्रह पद्धतियों पर आधारित यह मुख्य रूप से निम्नलिखित हैं-हार्ड डिस्क, फ्लापी डिस्क, तथा सी.डी. (Compact Disc) व डी.वी.डी. (Digital Versatile Disc) व रोम (ROM)।
हार्ड डिस्क
इसमे ठोस चुम्बकीय प्रणाली पर आधारित प्लेटों में कम्प्यूटर सिस्टम की सभी सूचनाएं सुरक्षित रहती है। सामान्यतः इसकी क्षमत 20 जी.बी. (Gigabyte) से 80 जी.बी. (Gigabyte) तक होती है।
फ्लॉपी डिस्क
कम मात्रा में सूचनाओं को संगृहीत कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए फ्लॉपी डिस्क का उपयोग किया जाता है। यह मैग्नेटिक ऑक्साइड से बना होता है जिस पर प्लास्टिक चढ़ा होता है। यह ठोस चुम्बकीय प्रणाली पर आधारित होता है तथा इसकी क्षमता 360 KB (Kilobyte) से 1.44 MB (Megabyte) तक होती है।
सी.डी. (Compact Disc) व डी.वी.डी. (Digital Versatile Disc) रोम (Read-Only Memory)
प्रकाशकीय संग्रह तकनीक पर आधारित यह माध्यम अत्यधिक मात्रा में सूचनाओं को संग्रह करने के लिए उपयोग में लाया जाता है। सी.डी. की क्षमता 650 MB 850 MB तक तथा डी.वी.डी. की 4.5 GB से 20 GB तक होती है। इसका उपयोग संगीत, वीडियो व अन्य प्रकार के अत्यधिक मात्रा वाली सूचनाओं को संग्रह करने में किया जाता है।
पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फॉरमेट (PDF) (Portable Document Format)
एडोब द्वारा तैयार किया गया यह यूनिवर्सल फाइल फॉरमेट है जिसमें किसी भी प्रकार के फॉन्ट, फॉरमेट और ग्राफिक्स को रखा जा सकता है।
सॉफ्टवेयर
कम्प्यूटर को संचालित करने तथा उसकी विभिन्न इकाइयों में समन्वय स्थापित करने वाली प्रणाली सॉफ्टवेयर के अन्तर्गत आती है। वस्तुतः हार्डवेयर को उपयोग में लाने वाले दिशा-निर्देशों के समुच्चय सॉफ्टवेयर हैं। कार्य प्रणाली के आधार पर इन्हें मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया गया है-
1.सिस्टम सॉफ्टवेयर
2.एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर
जो सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर के आंतरिक क्रियान्वयन को प्रभावित करता है, उन्हें सिस्टम सॉफ्टवेयर कहते हैं। इसका सबसे प्रमुख उदाहरण आपरेटिंग सिस्टम है जो कम्प्यूटर के क्रियान्वयन तथा सभी उपकरणों के समन्वय व उनको सुचारू रूप से चलाने के लिए बनाया गया है। प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम हैं-एम.एस. डॉस (MS-DOS), एम.एस. विण्डोज (MS-WINDOWS), लाइनेक्स (LINUX),यूनिक्स (UNIX)
वे सॉफ्टवेयर जिनका उपयोग उपयोगकर्ता अपने दैनिक कार्यों को करने के लिए करता है, उन्हें एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर कहते हैं। जैसे एम.एस. वर्ड पत्र लिखने के लिए, पेजमेकर व कोरल प्रकाशन व अन्य कार्यों के लिए।
कम्प्यूटर नेटवर्क
कम्प्यूटर नेटवर्क से तातपर्य है अलग-अलग कम्प्यूटरों को एक साथ जोड़ना ताकि उनके मध्य सूचना का आदान-प्रदान किया जा सके, विभिन्न प्रकार के संसाधनो का सामूहिक उपयोग हो सके और अलग-अलग स्थानों पर स्थित व्यक्ति किसी परियोजना पर संयुक्म रूप से कार्य कर सकें। नेटवर्क कई प्रकार के होते हैं, जिसमें सर्वप्रमुख है-विश्वव्यापी अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क ‘इंण्टरनेट’। भारत में अनेक प्रकार के नेटवर्क का विकास किया गया है। देश के कोने-कोने को जोड़ने के लिए ‘निकनेट’, ‘इण्डोनेट’, ‘एरनेट’, ‘आई-नेट’ इत्यादि जैसे राष्ट्रव्यापी कम्प्यूटर संचार नेटवर्क स्थापित किए गए हैं। इन नेटवर्कों का प्रयोग रेलवे आरक्षण प्रणाली, विमान आरक्षण प्रणाली, बैंकिंग व्यवस्था, भूमि सम्बन्धी रिकार्ड और संसद एवं राज्य विधानसभा चुनावों के सीधे प्रसारण के लिए व्यापक रूप में किया जा रहा है।
सूचना क्रांति के तीव्रता से विकसित होने के परिणामस्वरूप सूचनाओं के एक नए अंतरिक्ष की परिकल्पना परिलक्षित हुई है और इस पर कुछ लोगों का एकाधिकार समाप्त हुआ है। इस परिकल्पित अंतरिक्ष को साइबर स्पेस नाम दिया गया है। इस प्रणाली के अंतर्गत विश्व के विभिन्न देशों के कम्प्यूटर करोड़ों लोगों के विचार व एकत्र की गई सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं तथा विभिन्न प्रकार के आंकड़ों को आसानी से इधर-उधर शीध्रतापूर्वक भेजने में सक्षम हैं। वस्तुतः यह कम्प्यूटर प्रणाली का एक नेटवर्क है। इस प्रकार के तीन नेटवर्क पूरे विश्व में कार्यरत हैं-कम्प्यूसर्व, अमेरिका ओरलाइन और इण्टरनेट। इन तीनों में इण्टरनेट सबसे विशाल नेटवर्क है। इसे अधिकांशतः सूचना राजपथ (Information Highway) के नाम से पुकारा जाता है। कुछ अन्य प्रमुख कम्प्यूटर सूचना नेटवर्क हैं-इण्डोनेट, सरनेट, मार्कनेट, निकनेट, एरनेट, आई-नेट, सॉफ्टवेयर टेक्नालॉजी पार्क इत्यादि।
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